दिन के उजले आकाश में रोशनी का श्रेय सूरज को जाता है, पर रात होते ही शाम गुज़रते ही एक दीप की दरकार हर चौखट को होती है. ये दीप उसी संध्या का है जो दरोदीवार के साथ मन को भी रोशनी देता है. एक दीप तो मन का भी होना चाहिए. जो कालिमा को चीरकर रोशनी का स्वागत करे..हमे और हमारे सभी अपनों को रौशनी दे... मेरे सांध्य का दीप, दुनिया रोशन करेगा...
Monday, February 27, 2017
Friday, February 24, 2017
Friday, February 10, 2017
Friday, February 3, 2017
Thursday, February 2, 2017
Friday, December 4, 2015
Monday, November 23, 2015
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